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देश बदल रहा है-II

"कविता"   देश बदल रहा है -II               बदलाव प्रकृति का नैसर्गिक नियम है … पुराणी परंपरा टूट रही है , नयी परंपरा बन रही है   I राजनीति का स्थान , अब राज - नीति ने ले लिया है   I पहले राज से नीति बनती थी , अब नीति     से बनता राज है   I जीत के तरीके बदल गए , जीत के मायने बदल गए   I वाकई देश बदल रहा है , परिभाषाएं बदल रही है   I सम्बन्ध के मायने बदल रहे है , नैतिकता के मायने बदल रहे है   I नैतिकता जो राजनीति का कभी गहना थी , अब हारे का सहारा बन गयी है केवल   I दलित जो कभी चरण वंदना करता था , आज उसकी भी चरण वंदना हो रही है   I कंगाल भी दलित है और , करोड़ पति भी दलित है   I निचले पायदान पर भी दलित है , और शिखर पर भी दलित है   I दलित जो कभी शर्म का नाम था , आज स्टेटस सिंबल है दलित   I कोई तो बताओ क्या है दलित ,       क्या है दलित की परिभाषा   I क्या है दलित के मायने , वाकई देश बदल रह

देश बदल रहा है-I

  "कविता"       देश बदल रहा है- I प्रधानमंत्री मंच पर रो रहा है , बैंक कर्मी भी बिना आँसू रो रहा है , नोटेबंदी की मारी जनता बिना आवाज़ कराह रही है , सरकार बोली मेरा देश बदल रहा है…..! नोटेबंदी में मरे लोगों के घर विलाप हो रहा है , नोटेबंदी के कारण शव का संस्कार समय पर नहीं हो रहा , सरकार बोली मेरा देश बदल रहा है…..! कश्मीर जल रहा है , शहीदों की संख्या बढ़ रही है , कश्मीर नीति , पाक नीति फेल हो रही है , सरकार बोली मेरा देश बदल रहा है…..! अपनों एवं अपने परिवार का साथ छोड़ने वाले , देश को साथ लेकर चलने की बात कर रहें हैं , सरकार बोली मेरा देश बदल रहा है…..! दिल में कुछ और , ज़बान पर कुछ और , मुँह में राम - बगल में छूरी , को चरितार्थ करनेवाले , जनता को देश भक्ति की परिभाषा पढ़ा रहे हैं , सरकार बोली मेरा देश बदल रहा है…! मंहगाई , अपराध , बेरोज़गारी , आत्महत्या बढ़ रही है , नौजवानों में असुरक्षा , कुंठा , ग