गाँधी के मायने

गाँधी का नाम ज़ेहन में आते ही हमें एक ऐसे व्यक्ति की छवि नज़र आती है जैसे " एक बूढ़ा व्यक्ति जो एक धोती पहने है साथ ही हाथ में एक डंडा है और आँखों पर एक गोल चश्मा है या कभी चरखे के साथ " l क्योंकि कई दशकों से यही छवि शासन एवं प्रशासन के द्वारा लोगों को दिखाई जा रही है l जिसको हम सभी मोहनदस करमचंद गाँधी या गाँधी जी के नाम से जानते हैं l इसके अलावा कोई अन्य छवि मैंने तो अपने जीवन काल में अभी तक नहीं देखी है l निश्चित रूप से यह सोच के साथ शोध का विषय भी होना चाहिए l गाँधी जी से सम्बंधित जो भी जानकारी मेरे पास है वो केवल स्कूली शिक्षा, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं आम लोगों से बातचीत के द्वारा ही प्राप्त हुई है l इसके अलावा मैंने गाँधी जी से सम्बंधित कोई भी साहित्य अभी तक नहीं पढ़ा है l हमें ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि आज भारत में लोकतंत्र के बाजार में (Democracy Market or in the Market of Democracy) राजनीतिक लोगों एवं राजनीतिक पार्टियों के लिए गाँधी जी महज़ एक अदद राजनीतिक उत्पाद (Political Product) भर रह गए हैं जो समय-समय पर बेचे जाते हैं, क्योंकि हम देखते हैं कि ये सभी अपनी सुविधानुसार या हितानुसार समय-समय पर गाँधी जी की व्याख्या अपने हिसाब से करते रहते हैं l जहाँ तक आम जनता की बात है तो हम पाते है कि "मज़बूरी का नाम महात्मा गांघी" और "गाँधी बिना गति नहीं" जैसे वाक्य हम आम जीवन में आम लोगों से अक्सर सुनते रहते हैं l इन दो वाक्यों पर सोच की नहीं बल्कि गहन शोध की आवश्यकता है l गाँधी जी की देश में वही स्थिति है जो देश में रामायण और गीता ग्रंथों की है क्योंकि इन दोनों ग्रंथों को तो लोग मानते हैं लेकिन इन दोनों ग्रंथों की कभी नहीं मानते हैं l गाँधी जी एक विशेष व्यक्तित्व के स्वामी थे तभी तो उनके जितने समर्थक मिलेंगे उतने ही आलोचक भी मिल जायेंगे l यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि राजनीतिक लोग गाँधी जी के बारे में आफ दी रिकॉर्ड कुछ और बोलते हैं और ऑन रिकॉर्ड कुछ और बोलते हैं इसी से इनकी सख्शियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है l समय का सदुपयोग कैसे किया जाता है और सही समय पर सही निर्णय कैसे लिया जाता है, इस काम में गाँधी जी को महारथ हासिल थी l चाहे उनकी कार्यशैली हो या जीवनशैली हो अथवा उनका वक्तव्य हो l गाँधी जी ने अपने जीवन में किसी भी अवसर को व्यर्थ नहीं जाने दिया अर्थात प्रत्येक अवसर का पूरा-पूरा उपयोय ही नहीं सदुपयोग किया तभी तो वह कभी सूट-बूट में नज़र आये तो कभी केवल धोती में तो कभी चरखा चलाते हुए इत्यादि l निश्चित रूप से गाँधी जी पर अध्ययन करने से कोई भी व्यक्ति बहुत कुछ पा सकता है, शर्त केवल यह है कि नजरिया सकारात्मकता का या कुछ पाने का होना चाहिए l फिलहाल भारत में गाँधी जी को ठुकराने की किसी में हिम्मत नहीं है चाहे वो उनका कट्टर समर्थक हो या कट्टर विरोधी l यह एक ऐसी सच्चाई है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है l कम से कम यदि भारत में रहना है तो फिलहाल "यस टू गाँधी जी" बोलना ही होगा l आज के परिपेक्ष में इतना ही l आपने पढ़ा इसके लिए अग्रिम धन्यवाद !
प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी !

लेखक एवं प्रस्तुति
सुभाष वर्मा
Writer-Journalist-Social Activist
www.LoktantraLive.in
loktantralive@hotmail.com


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