आज का नेता - ऑफ रिकार्ड (व्यंग)

( आज का नेता ऑफ रिकार्ड क्या सोचता है और क्या बोलता है यह हमने एक पत्रकार और नेता के वार्तालाप (सवाल-जवाब) को व्यंग के माध्यम से बताने का प्रयास किया है l किसी भी बात का या शब्दों का किसी से मिलना महज़ संजोग हो सकता है या माना जायेगा l किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने की हमारी बिल्कुल भी मंशा नहीं है l ) सवाल : नेता जी बाहर विजय घोष और अंदर लगातार फोन की घंटी, बधाई हो, क्या कहना है आपका ? जवाब : देखिये बाहर जो विजय घोष आप सुन रहे हैं वो सब भाड़े पर आये हैं अपना पैसा खर्च करके कोई नहीं आता जय घोष करने और अंदर जो घंटी बज रही है यह बधाई देने वालों की नहीं है, बल्कि उन लोगों की है जिनसे हमने चुनाव में पैसा लिया था, वो लोग अपने काम और ब्याज समेत पैसे वापसी की लगातार याद दिलाये जा रहे हैं, जनता के पास तो हमारा नंबर ही नहीं होता है l अब समझे आप यही हमारा नेताओं वाला असली लोकतंत्र है l सवाल : नेता जी चुनाव होते रहते हैं लेकिन जनता का कुछ होता क्यों नहीं ? जवाब : जी जनाव, जनता का कुछ होगा भी कैसे l पहले चुनावी खर्चा लाख में था फिर लाखों में हुआ फिर करोड़ और अब करोड़ों में l अब आप ही बताओ यह बात सही है की नहीं l भाई पहले हम अपना खर्चा निकलते हैं फिर उसका प्रॉफिट निकालते हैं फिर अगले चुनाव का खर्चा भी निकलना पड़ता है l यही सब निकालते निकालते पांच साल निकल जाते हैं l काम कब करें, समय ही नहीं मिलता है l अब आप ही बताओ जनता का कुछ कैसे होगा l सवाल : अब आप की प्राथमिकता क्या-क्या है ? जवाब : प्राथमिकता वही है जो होनी चाहिए अर्थात सबसे पहले अपने पुराने खर्चे निकलना उसके बाद इसका दस गुना पैसा पैदा करना l क्योंकि अगले चार चुनाव के लिए खर्चे का इंतज़ाम पक्का करना है क्योंकि अब वोट पाना और कार्यकर्ता को पालना बहुत मंहगा होता जा रहा है l अगर यही हाल रहा तो आने वाले सालों में राजनीतिक कार्यकर्ता एक इंडस्ट्री के रूप में विकसित हो जायेगा l क्योंकि भारतीय राजनीति अब बहुत तेज़ी से कारपोरेट राजनीति में तब्दील होती जा रही है l सवाल : वोटर लोभी और नेता ठग है, क्या कहना है आपका इस पर ? जवाब : जी, मैं पूरी तरह आप की बात से सहमत हूँ, देखिए जनता को सब्सिडी और मुफ्तखोरी की आदत पड़ गयी हैं l हर चुनाव में इनकी डिमांड की लिस्ट लम्बी होती जा रही हैं l बिना पैसा-खर्च लिए न तो कोई रैली में आता हैं और न ही हमारा भाषण सुनता हैं ऐसे में हमारा चुनावी खर्च हर चुनाव में डबल होता जा रहा है l हम इनको ठगेंगे नहीं तो क्या करेंगें बताइये आप l ये लोभी हैं इसलिए हम ठग हैं, इन्होने हमें जबरजस्ती ठग बनने पर मज़बूर कर दिया हैं l कसूरवार पूरी तरह जनता है हम नहीं l सवाल : यू-टर्न लेना और थूक कर चाटने की प्रवृत्ति भारतीय राजनीति में धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है, कुछ बताएंगें आप इस बारे में ? जवाब : जी, बिलकुल सही है, देखिये यह समय की मांग बन गयी है और नेता भी समाज का ही अंग है, हमारा थोक के भाव पैसा चुनाव में लगा होता है और जब इसकी वापसी पर संकट दिखता है तो हम लोगों के पास यू-टर्न लेने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है और यदि हमें ऐसा मौका मिलता है तो हम ले लेते हैं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है l दूसरी बात थूक कर चाटने से यदि सत्ता मिलती है तो हम एक नहीं सौ बार ऐसा करने को तैयार हैं l सत्ता के लिए कुछ भी करेगा, ये हमारा पहला और अंतिम वसूल है l लेकिन हम तो इससे भी आगे जाने को तैयार हैं, कोई ऑफर तो लाये सत्ता में आने के लिए l सवाल : आजकल रैलियों में भीड़ काफी आ रही है, जनता जागरूक हो गयी है या देश प्रेम बढ़ गया है ? जवाब : देखिये जनता जागरूक नहीं ज्यादा चालू हो गयी है l जो भीड़ आप देख रहे हैं इनमें 99 % भाड़े के आदमी हैं भाई l खाना-खर्चा अलग से l ये सभी तत्काल लाभ लेने वाले लोग हैं l और जहाँ तक देश प्रेम की बात है तो भाई क्या नेता और क्या जनता सब अपने प्रेम में लगे हुए है l इसमें कुछ गलत भी नहीं हैं l देखिये यह लेन-देन (give & take) का ज़माना है, सब ऐसे ही चलता है l सब हैप्पी-हैप्पी हैं l सवाल : किसान की हालत नहीं सुधरती है देश में क्या कारण हैं ? जवाब : देखो भाई, इतिहास देखो और उससे कुछ सीखो भी, किसान नामक प्राणी सदियों से इसी हालत में जीता आ रहा है हम क्या कर सकते हैं l दूसरा काम क्यों नहीं करता यह, कौन रोक रहा है जी इसको l मुफ्त में खाद, बीज़ और लोन चाहिए l फसल ज़्यादा हो तो मुआवज़ा और कम हो तो मुआवज़ा चाहिए l यही लालच उसको बदलने नहीं दे रही है l किसान कमा भी रहा है और रो भी रहा है l सबसे मक्कार कौम है आज देश में यही है जी l सवाल : व्यवस्था बदलती नहीं और भ्रष्टाचार समाप्त होता नहीं क्या कारण है ? जवाब : व्यवस्था बदल तो रही है, और बदतर होती जा रही है दिनों दिन, दिख नहीं रहा आपको l देखिये जैसे-जैसे चुनाव जितना महंगा होता जाएगा वैसे-वैसे भ्रष्टाचार बढ़ता जायेगा और स्वाभाविक है ऐसे में व्यवस्था और बदतर होगी ही l इसमें गलत क्या है जी l ईमानदारी से तो चुनावी खर्चे की वापसी संभव ही नहीं है ये तो जग ज़ाहिर है ना l आने वाले समय में देश भ्रष्टाचार के नए-नए मापदंड स्थापित करेगा आप देखना l सवाल : बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है देश में क्या कारण है कुछ हो नहीं पा रहा इस विषय में ? जवाब : देखो भाई, लोग हमसे पूछ कर तो परिवार नहीं बढ़ा रहे ना फिर बेरोज़गारी के लिए सरकार क्यों ज़िम्मेदार हो ? आबादी देखो कहाँ तक बढ़ गयी है ? आबादी रोकने के लिए कानून बनाओ तो सत्ता चली जाएगी, बहुत मुश्किल है भाई l इसका कोई समाधान नहीं है इसलिए ये कोई समस्या नही है l जनता को यह बात अच्छी तरह पता है l चुनावी मुद्दा भर है यह और कुछ नहीं l सवाल : नेता जी आपने अपना कीमती समय हमें दिया आपका बहूत-बहूत धन्यवाद ? जवाब : अरे नहीं भाई ऐसी बात नहीं है, इससे तो हमारे अंदर जो सच्चाई की गैस भरी रहती वो निकल जाती है आपके सामने नहीं तो कहीं जनता के सामने निकल गयी तो हमारा तो कैरियर ही चौपट हो जायेगा, धन्यवाद तो आपका जी, मिलते रहा करो लेकिन ऑफ रिकॉर्ड बताना नहीं भूलना l

लेखक एवं प्रस्तुति
सुभाष वर्मा
Writer-Journalist-Social Activist
www.LoktantraLive.in
loktantralive@hotmail.com

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