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मैं मज़दूर हूँ….मज़बूर नहीं

मैं मज़दूर हूँ …. मज़बूर नहीं मैं मज़दूर हूँ मज़बूर नहीं...! ज़ीने का ज़ज़्बा हैं मुझमें ज़िंदा हूँ मैं ज़िंदा लाश नहीं...! ऊपर आसमान है नीचे तपती ज़मीन है मंज़िल है दूर लेकिन हौसला उससे बड़ा है...! कोई देता नहीं सब मांगते हैं यहाँ लक्ष्य दूर है लेकिन पैर भी तो साथ हैं...! नीयत साथ है और नियति को सलाम है...! यात्री भी हूँ मैं और अपनों का सारथी भी हूँ मैं...! झूठा है तेरा वादा गन्दा है तेरा इरादा कैसे भरोसा करूँ तुझ पर...! ज़रूरतें हैं मेरी कम जी लूँगा कहीं भी लेकिन यहाँ नहीं कभी नहीं...! इंसान हूँ मैं भी इंसानियत जीता हूँ...! मैं मज़दूर हूँ-मज़बूर नहीं…!  यह दर्द है उन मज़दूरों का जो देश में लाकडाउन के कारण अप्रैल - मई 2020 की तपती गर्मी में निकल पड़े हैं पैदल ही 1000-15000 की यात्रा पर अपने अपने गावों की ओर अपने परिवार और मासूम बच्चों के साथ I यह सोच कर ही रूह कांप जाती है ?  क्या अंतरिक्ष से ज़मीन पर कौआ और कबूतर देखने वाली सरकार को यह दिखाई नहीं दे रहा है ? जबकि मीडिया पर लाइव रिपोर्टिंग भी आ रही है I क्या लाखों करोड़ का NPA करने...

2020 का अनोखा चुनाव (व्यंग)

जी हाँ फ़रवरी 2020 का दिल्ली विधान सभा चुनाव अपने आप में एक अनोखा ही नहीं अदभुत चुनाव साबित हुआ है । क्योंकि भारतीय लोकतंत्र में जहाँ तक मुझे याद है कि यह शायद पहला ऐसा चुनाव था जिसमें सभी पक्ष खुश और संतुष्ट दिखे । कुछ पार्टी समर्थकों से हमने इस चुनाव परिणामों के बारे में बात की जिसका निष्कर्ष यहाँ प्रस्तुत है :- आम आदमी पार्टी अपनी इस जीत को ऐतिहासिक बता रही है क्योंकि उसकी सरकार में वापसी हुई है । बेशक उसके सीटों की संख्या में कमी आ गयी है । क्योंकि उसको 67 के मुकाबले 62 सीटें ही प्राप्त हुई हैं । यकीन मानिये अगर वह 40 सीट भी जीत कर अपनी सरकार बना लेती तो भी वह इसको ऐतिहासिक ही बताती क्योंकि परिणामों को अपने पक्ष में बताना कोई नयी बात नहीं है और इसमें कोई बुराई भी नहीं है । आम आदमी पार्टी को इस ऐतिहासिक जीत की बधाई । भारतीय जनता पार्टी भी इस चुनाव परिणामों को अपनी ऐतिहासिक कामयाबी के तौर पर पेश कर रही है क्योंकि उसको 3 के मुकाबले 8 सीटों की प्राप्ति हुई है और विशेष बात यह है कि पहली बार उसको दिल्ली में अकाली दल के अलावा JDU और LJP जैसे दो सहयोगी मिल गए अर्थात एक की जगह...

आज का नेता - ऑफ रिकार्ड (व्यंग)

( आज का नेता ऑफ रिकार्ड क्या सोचता है और क्या बोलता है यह हमने एक पत्रकार और नेता के वार्तालाप (सवाल-जवाब) को व्यंग के माध्यम से बताने का प्रयास किया है l किसी भी बात का या शब्दों का किसी से मिलना महज़ संजोग हो सकता है या माना जायेगा l किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने की हमारी बिल्कुल भी मंशा नहीं है l ) सवाल : नेता जी बाहर विजय घोष और अंदर लगातार फोन की घंटी, बधाई हो, क्या कहना है आपका ? जवाब : देखिये बाहर जो विजय घोष आप सुन रहे हैं वो सब भाड़े पर आये हैं अपना पैसा खर्च करके कोई नहीं आता जय घोष करने और अंदर जो घंटी बज रही है यह बधाई देने वालों की नहीं है, बल्कि उन लोगों की है जिनसे हमने चुनाव में पैसा लिया था, वो लोग अपने काम और ब्याज समेत पैसे वापसी की लगातार याद दिलाये जा रहे हैं, जनता के पास तो हमारा नंबर ही नहीं होता है l अब समझे आप यही हमारा नेताओं वाला असली लोकतंत्र है l सवाल : नेता जी चुनाव होते रहते हैं लेकिन जनता का कुछ होता क्यों नहीं ? जवाब : जी जनाव, जनता का कुछ होगा भी कैसे l पहले चुनावी खर्चा लाख में था फिर लाखों में हुआ फिर करोड़ और अब करोड़ों मे...

आज का नेता - ऑन रिकार्ड (व्यंग)

( आज का नेता ऑन रिकार्ड क्या सोचता है और क्या बोलता है यह हमने एक पत्रकार और नेता के वार्तालाप (सवाल-जवाब) को व्यंग के माध्यम से बताने का प्रयास किया है l किसी भी बात का या शब्दों का किसी से मिलना महज़ संजोग हो सकता है या माना जायेगा l किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने की हमारी बिल्कुल भी मंशा नहीं है l ) सवाल : नेता जी बाहर विजय घोष और अंदर लगातार फोन की घंटी, बधाई हो, क्या कहना है आपका ? जवाब : देखिये यही तो लोकतंत्र की खूबी है, कि लोगों को जब लम्बे समय के बाद अपने पसंद की सरकार मिली है तो वे अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करने यहाँ भरी संख्या में पहुंचे हैं और जो किन्ही कारणों से नहीं आ सके वो फोन पर अपनी ख़ुशी का इज़हार लगातार कर रहे हैं l भाई ये जनता है, इसको पूरा हक़ है अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करने का l देखिये इनको हम पर बहुत भरोसा है और ये सभी हमें बहुत प्यार करते हैं और मैं भी l सवाल : नेता जी चुनाव होते रहते हैं लेकिन जनता का कुछ होता क्यों नहीं ? जवाब : जी देखिये, जनता की उम्मीदें हर बार बढ़ जाती हैं इसलिए ऐसा लगता है कि कुछ हुआ ही नहीं l सरकार के आंकड़े उठा कर देख लीजिये सरकार क...

ज्योतिष शक्ति

पहली बात यह कि मानव जीवन में बहुत कुछ पूर्व निर्धारित है और इसमें ज्यादा बदलाव संभव नहीं है । तभी तो कोई कितना भी प्रयास कर ले सब कुछ नहीं कर सकता जो वह सोचता या चाहता है । जो कुछ भी वह प्राप्त करता है वह अपने कर्मों के माध्यम से ही पाता है । दूसरी बात यह कि कर्म के साथ यदि वास्तु और मुहूर्त को मिला दिया जाय तो निश्चित रूप से कुछ ज्यादा पाया जा सकता है । यह वास्तु और मुहूर्त ज्योतिष के माध्यम से ही प्राप्त होता है । सदैव याद रखें कि कहते हैं कि यदि कोई कार्य सही समय पर या शुभ समय पर और एक सही दिशा में प्रारम्भ किया जाय तो उसकी सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है । साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि भारतीय ज्योतिष के अनुसार मानव जीवन में अधिकतम सुःख 40% और न्यूनतम दुःख  60% निर्धारित है और इसमें परिवर्तन केवल कर्म एवं ज्योतिष के माध्यम से ही संभव है । आवश्यकता है मात्र एक ज्ञानी एवं अनुभवी ज्योतिषी की । आज ...

ज्योतिष - ज्योतिषी – जातक

ज्योतिष भारतीय प्राचीन ग्रंथों एवं शास्त्रों के अनुसार कुल 9 ग्रहों, 27 नक्षत्रों, 12 राशियों की आकाश गंगा में स्थिति एवं गति या चाल की गणना करने की जो पद्धति या विधि है वह ज्योतिष कहलाता है । इसके नियम बिलकुल अचूक हैं और आज हज़ारों वर्षों के बाद बह वही परिणाम दे रहे हैं । ज्योतिषी ज्योतिष की विधियों को जानने वाला या इन विधियों का प्रयोग करके जो व्यक्ति परिणाम देता है वह ज्योतिषी कहलाता है । ज्योतिष के अंतर्गत गणना करके परिणाम देने वाली अनेकों विधियां प्रचलित हैं । लेकिन भारत में जन्म कुंडली या प्रश्न कुंडली देखकर फलित या ज्योतिषीय परिणाम देना ही अधिक विश्वसनीय माना जाता है और है भी । इसके अनुसार जो व्यक्ति कुंडली के 12 भावों में 12 राशियों , 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों की जन्मकालीन स्थिति और वर्तमान स्थिति की गणना के साथ ही कुंडली में स्थित योग एवं वर्तमान दशा के अनुसार परिणाम देता या बताता है वह ज्योतिषी कहलाता है । आज विज्ञान के बाद परमात्मा और परमात्मा के बाद ज्योतिषी ही सबसे अधिक विश्वसनीय और पूज्यनीय होता है चाहे मज़बूरी में ही सही । ऐसा मेरा मानना है । जातक ज्योतिष विधि को ...

नेता नहीं अभिनेता

नेता नहीं अभिनेता है ये, नेता के चोले में अभिनेता है ये l जान लो इसको - पहचान लो इसको, हक़ीक़त नहीं छलावा है ये l तुम्हारे लिए नहीं - अपने लिए आया है ये, कुछ देने नहीं - बहुत कुछ लेने आया है ये l दुःख दे जाएगा - सुख ले जायेगा ये , क्योंकि नेता नहीं अभिनेता है ये l सोच इसकी निराली है-शैली इसकी मायावी है, छलना और छलावा इसकी प्रवृत्ति है l जो दिखता है-वो है नहीं ये, जो बोलता है वो करता नहीं ये l बातों में इसके आना नहीं, संग इसके जाना नहीं l साज़िश के साये में रहता है ये , साज़िश की खेती करता है ये l क्योंकि नेता नहीं अभिनेता है ये -छलावा है ये, समय रहते जान लो इसको-पहचान लो इसको l लेखक एवं प्रस्तुति सुभाष वर्मा Writer-Journalist-Social Activist www.LoktantraLive.in loktantralive@hotmail.com